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पहाड़ों में सूखे जैसे हालातों से काश्तकारों ने रबी फसल तक नहीं बोई

नैनीताल। उत्तरांखड के पर्वतीय क्षेत्रों में इस बार सूखे मौसम के कारण हालात लगातार खराब होते जा रहे है। हालत यह है कि उपराऊं क्षेत्रों में काश्तकारों ने रबी की फसल तक नहीं बोई है। मौसम काश्तकारों व बागवानों की चिन्ता बढऩे लगी है। वर्षा खत्म होने के बाद अब तक वर्षा नहीं होने से कृषि व बागवानी प्रभावित हो चुकी है। बागवानी के लिए वर्षा व ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फवारी इन दिनों आवश्यक होती है। लेकिन वह दूर-दूर तक नहीं है। यदि अब भी यही हालत रहे तो इस बार काश्तकारों की कमर ही टूट जायेगी। इसी तरह बागवानी करने वाले लोगों में भी चिन्ता हुई है। जाड़ों में सेब, आडू, खुमानी, पूलम आदि फलों के बागानों को भरपूर हिमपात की जरूरत होती है। लेकिन इस बार कुछ जिलों के ऊंचाई वाले हिस्सों को छोड़ अन्य स्थानों में हिमपात दूर वर्षा तक नही हुई है। ऐसे में इसका सर्वाधिक प्रभाव अब पहाड़ों की खेती किसानी में दिख रहा है।
मालूम हो कि पर्वतीय क्षेत्र में नवम्बर व दिसम्बर माह से रबी की फसल बुआई का कार्य शुरू होता है। वहीं बागवानी के तैयारी भी इन्हीं दिनों की जाती है। लेकिन आधी जनवरी बीत जाने के बाद भी वर्षा व बर्फवारी नही हुई है। इसका सबसे अधिक कुप्रभाव पड़ रहा है। पहाड़ों में अच्छे उत्पादन के लिए बागानों में इन दिनों नमी के लिए वर्षा व बर्फबारी की भी जरूरत होती है। लेकिन अभी तक वर्षा ऋ तु के बाद वर्षा अब तक नहीं हो पाई है। पर्वतीय क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा अधिक नहीं होने से यहां 80 प्रतिशत कृषि व बागवानी वर्षा पर निर्भर है। लेकिन पिछले तीन वर्षों से रूखे मौसम ने काश्तकारों की कमर ही तोड़ दी है। सरकार को पर्वतीय क्षेत्र के कई जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा। इस वर्ष भी मौसम ने पुनरावृत्ति की हैं वर्षा ऋ तु के बाद नैनीताल सहित अन्य जिलों में वर्षा तक नहीं हुई है। वर्तमान में जब रबी की फसल बोने का समय आ चुका है तो उपराऊ क्षेत्र के काश्तकार आसमान की ओर टकटकी लगाये हुए है। किसानों ने अब तक खेतों की जुताई तक नहीं की है। बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी मौसम के तेवर यही रहे तो किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। पहाड़ों में कई दूरस्थ इलाकों में खेतों से ही ग्रामीण दो जून की रोटी जुटाते हैं।

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