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हल्द्वानी:पहाड़ों के वातावरण में जहर घोल रहा प्रदूषण

भूपेश कन्नौजिया /हल्द्वानी। शहर में जहां प्रदूषण का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है वहीं पहाड़ी क्षेत्रों पर भी इसका व्यापक असर पड़ रहा है। ताज्जुब की बात है कि हल्द्वानी से पहाड़ी क्षेत्रों जैसे भीमताल, नैनीताल, मुक्तेश्वर, भवाली, रानीखेत, पिथौरागढ़, चंपावत सहित अन्य पर्यटन स्थलों में वायु प्रदूषण जांच कभी हुई ही नहीं जबकि यह इलाके भी पहले की अपेक्षा अब काफी दबाव झेल रहे हैं। तीन साल पहले जब उत्तराखंड के जंगल आग से झुलस रहे थे तब जरूर थोड़ा बहुत रीडिंग दर्ज की गयी। मगर आज तक पहाड़ों पर प्रदूषण मापक यंत्र नहीं लगाए गए। केवल हल्द्वानी कार्यालय से ही अधिकारी बैठे-बैठे सब ठीक ठाक होने की बात कहते नजर आते हैं। हल्द्वानी की बात करें तो सुबह धुंध सी प्रतीत होने वाली चादर दरअसल धूल, मिट्टी के कण हैं जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हैं।
जबकि दूसरी ओर जिन पहाड़ी इलाकों में बर्फ पड़ती थी आज वहां बारिश भी समय पर नहीं होती। तापमान वृद्धि इतनी हो गयी है कि लोगों को अब पहाड़ों पर भी पंखों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्लेशियर निरंतर पिघल रहे हैं, वहीं प्रदूषण की वजह से बारिश का अलग-अलग खंडों में होना, वन्य जीवों, फल पट्टी और मानव स्वास्थ्य पर व्यापक असर पड़ा है।
फिलहाल अगर हल्द्वानी की बात करें तो शहर में महिला अस्पताल के पास एक प्रदूषण मापक यंत्र लगा है जिससे प्राप्त आंकड़ों पर नजर डालें तो हल्द्वानी में सामान्य से ज्यादा प्रदूषण में इजाफा हुआ है। जनवरी 2017 से जून 2017 तक 149.4 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक वायु प्रदूषण दर्ज किया गया जबकि यह अगर 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होता तो स्थिति सामान्य होती। कहना गलत न होगा कि आने वाले समय में हल्द्वानी में जिस तरह दबाव पड़ रहा है यह आंकड़ा मामूली रह जायेगा। हल्द्वानी स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डॉ. डीके जोशी का कहना है कि फिलहाल हल्द्वानी का पहाड़ी सीमाओं से घिरा होने के चलते प्रदूषण का स्तर नुकसानदेह नहीं है मगर बढ़ता वाहनों का दबाव, स्टोन क्रशर, फैक्ट्री आदि स्थापित होने की वजह से अब हालात परेशान करने वाले हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही वायु प्रदूषण मापी यंत्र पांच अन्य चिन्हित केंद्रों में स्थापित किये जाने की संभावना है जिससे पहाड़ों पर बढ़ते प्रदूषण को दर्ज किया जा सके व लगातार मॉनिटरिंग की जा सके।

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