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नैनीताल: पालिका आवासों में रह रहे लोगों को करना होगा कब्जा खाली

आवास खाली न होने पर एफआईआर व किराया वसूलने आदेश

सैकड़ों लोगों का है पालिका के आवासों में लम्बे समय से अनाधिकृत कब्जा

नैनीताल में एसएलपी खारिज होने के बाद आवासों के कब्जेदारों में हडक़म्प

चन्द्रेक बिष्ट,नैनीताल। उत्तराखंड में पूर्ववती हरीश रावत सरकार द्वारा प्रदेश भर में स्थानीय निकायों में पालिका आवासों में रह रहे रिटायर्ड पालिका कर्मियों व अन्य लोगों को आवासों का मालिकाना हक देने के बाद अब पुन: सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नैनीताल में 545 आवासों को खाली कराने व 1990 से आज तक तीन हजार मासिक किराया वसूल करने के आदेश दिये हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पालिका आवासों में रह रहे लोगों में खलबली मची हुई है। उत्तराखंड हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में आवास खाली कराने के आदेश दिये थे जिसके खिलाफ नैनीताल निवासी मशरूर अहमद खान ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी जिसे न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने खारिज कर दिया है। पूर्व में उत्तराखंड हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेशों के क्रम में अब आवास खाली कराने होंगे। पालिका के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार बीती सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज करते हुए आवासों को खाली कराने को कहा है। पालिका कोर्ट के आदेशों का अध्ययन कर रही है उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी। पालिका के 545 आवासों में लोगों का कब्जा है।
मालूम हो कि पूर्व में नैनीताल में हाई कोर्ट के आदेशोंं के बाद आवासों को खाली कराने की कवायद शुरू हुई थी। आवासों का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था। अब यह निस्तारित कर दिया गया है। बता दें कि बीते वर्ष 27 अक्टूबर को जारी पत्र में विभाग के अपर निदेशक उदय सिंह राणा ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के वाद संख्या 4064/2004 एसडी बांदी बनाम क्षेत्रीय स्टेट अधिकारी में पालिका के आवासों में रह रहे रिटायर्ड कर्मियों व अन्य लोगों को अनाधिकृत मान कर आवास खाली कराने के आदेश दिये हैं। अपर निदेशक ने यह भी कहा है कि वर्ष 2007, वर्ष 2008 व 2009 में भी निदेशालय व शासन स्तर पर इन आवासों को खाली कराने के लिए ईओ को पत्र भेजे गये थे लेकिन आज तक आवास खाली नहीं कराये गये। अत: अब सभी पालिका परिषद, नगर निगम, नगर पंचायतों के ईओ व अध्यक्ष अनाधिकृत रूप से रह रहे लोगों को 15 दिन का नोटिस देकर आवास खाली करायें। अपने पत्र में अपर निदेशक ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में स्पष्ट कहा है यदि अनाधिकृत लोग नोटिस देने के बाद भी आवास खाली नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जाय। यही नहीं उनकी संपत्ति से रिकवरी एक्ट के तहत दंडनीय किराया वसूला जाय। पत्र में कहा गया है कि निदेशालय के संज्ञान में आया है कि पूर्व में शासन स्तर पर भेजे गये निर्देशों का पालन नही करने से आवासों में कब्जा जारी है। यह न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है वही शासन के आदेश भी नहीं माने जा रहे हैं। अब सभी पालिका परिषद, नगर निगम, नगर पंचायतों के ईओ व अध्यक्ष व्यक्तिगत ध्यान रख आवासों को तत्काल खाली करायें। अन्यथा सुप्रीम कोर्ट के पारित आदेशों के तहत आवास खाली न करने वालों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जाय। हाई कोर्ट ने भी इसी क्रम में अपने आदेश पारित किये थे। सुप्रीम कोर्ट व शहरी विकास विभाग के आदेशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर हुई थी। जिसे खारिज कर दिया गया है। शहरी विकास विभाग अपने पूर्व में जारी आदेशों के क्रम में अब आवास खाली कराने के लिए सक्रिय हो गया है। पूर्व में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक भी कई बार आवासों से अवैध कब्जे हटाने की बात कर चुके हैं।

 

 

 

पालिका के आवासों को खाली कराने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेशों का अध्ययन किया जा रहा है। शहरी विकास विभाग के अपर निदेशक के पूर्व में जारी पत्र पर मंथन कर कोई निर्णय लिया जायेगा। बीती सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज करते हुए आवासों को खाली कराने को कहा है। पालिका कोर्ट के आदेशों का अध्ययन कर रही है उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी। पालिका के 545 आवासों में लोगों का कब्जा है। कानूनी राय के बाद ही समुचित रूप से निदेशालय व कोर्ट के आदेशों का पालन किया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नैनीताल में 545 आवासों को खाली कराने व 1990 से आज तक तीन हजार मासिक किराया वसूल करने के आदेश दिये हैं।

रोहिताश शर्मा, ईओ पालिका परिषद नैनीताल।

 

 

 

 

 

नैनीताल में स्थित 545 पालिका आवासों में रहे हैं लोग

नैनीताल। नगरपालिका परिषद नैनीताल के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित 545 आवासों में वर्तमान में पालिका में कार्यरत कर्मचारी, पालिका के सेवा निवृत्त कर्मचारी, ऐसे लोग जिन्हें पालिका के द्वारा भवन आवंटित किये गये है रह रहे है इसके अलावा कुछ लोग ऐसे है जिन्होंने पालिका के द्वारा आवंटित किये गये भवन को किसी अन्य को सबलेट कर दिया है। पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने बताया कि वर्तमान में पालिका में कार्यरत कर्मचारी व जिन लोगों को पालिका के द्वारा भवन आवंटित किये गये थे उनके अलावा जो भी पालिका के आवास में रह रहे है वह अवैध की श्रेणी में आते है। मालूम हो कि नैनीताल में उत्तराखंड हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशोंं के बाद आवासों को खाली कराने की कवायद शुरू हुई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर होने से अभी तक यथास्थिति बनी हुई थी।

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