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देहरादून:पांच फिल्मों की एक भी डीवीडी नहीं बेच पायी

आरटीआई…..
सबसे ज्यादा 190 डीवीडी बिकीं ‘क्रिस, तृस और बाल्टी ब्वाय-1’ की
फिल्म के निर्देशक व कलाकार भी नहीं खरीदते डीवीडी
17 साल में 4127 डीवीडी बेची हैं सोसायटी में
मदन मोहन लखेड़ा
देहरादून। चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी ऑफ इंडिया सरकार के लिए किसी सफेद हाथी से कम नहीं। सोसायटी के कारनामे देख कर आप दंग रह जाएंगे। देहरादून निवासी राजू गुसाईं ने जब सूचना के अधिकार के माध्यम से सोसायटी की वर्ष 2000 से लेकर 2017 की उपलब्धियों का विवरण मांगा तो कई चौंकाने वाले तथ्य खुलकर सामने आए। यहां हम आपको बता दें कि सोसायटी बाल फिल्मों का निर्माण करती है। इन फिल्मों को थियेटर में तो प्रदर्शित नहीं किया जाता अलबत्ता फिल्मों की डीवीडी बना कर बाजार में उतारी जाती है।
लेकिन सोसायटी इन फिल्मों का विपणन किस तरह करती है यह अपने आप में किसी रहस्य से कम नहीं है। राजू गुसाई को सोसायटी के सूचना अधिकारी द्वारा भेजी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2000 से 2017 तक कुल 69 फिल्मों का निर्माण किया। इन फिल्मों की सोसायटी ने कुल 4127 डीवीडी बेची। एक डीवीडी का मूल्य सौ रुपये है। इस प्रकार करोड़ों रुपये खर्च करके सोसायटी ने 412700 रूपये की कमाई की।
सोसायटी लेखक-निर्देशक से कहानी आदि मांगती है, और उस पर सरकारी खर्च से फिल्म का निर्माण किया जाता है। सृत्रों के अनुसार एक फिल्म के निर्माण में बीस लाख से एक करोड़ तक का खर्च आता है। यहां हैरत वाली बात यह है कि सोसायटी द्वारा बनाई गई 69 में से पांच फिल्में ऐसी है जिनकी एक भी डीवीडी नहीं बिक सकी। 14 फिल्में ऐसी है जिनकी अधिकतम बीस डीवीडी बिकीं। जबकि 15 फिल्में ऐसी हैं जिनकी 21 से अधिक और 50 से कम डीवीडी बिकीं। सोसायटी के माध्यम से सबसे ज्यादा डीवीडी की बिक्री वाली बाल फिल्म है ‘क्रिस, तृस और बाल्टी ब्वाय-1’। जानते हैं इस फिल्म की कितनी डीवीडी बिकीं, कुल जमा 190। यह है सोसायटी की सबसे बड़ी उपलब्धि। वर्ष 2008-09 में बनी इस फिल्म को सोसायटी की ब्लॉक बस्टर बाल फिल्म कह सकते हैं।
यहां बड़ा सवाल यह है कि जिन फिल्मों की एक भी डीवीडी नहीं बिकी, क्या उसके कलाकार, निर्देशक व अन्य सहयोगियों ने फिल्म की कोई डीवीडी खरीदी ही नहीं होगी। वर्ष 2005-06 में सोसायटी ने ‘गाजा उकीलेर हत्या रहस्य’ नाम से एक बाल फिल्म का निर्माण किया था, इस फिल्म की एक मात्र डीवीडी बिकी। ऐसे ही वर्ष 2011-12 में आई फिल्म ऐलगेलु और एबगेटया की क्रमश: तीन व दो डीवीडी बिकीं। वर्ष 2015-16 में आई शानू फिल्म की कुल चार डीवीडी की बेच पाई सोसायटी। वर्ष 2017 में आई पिंटी का साबुन की अब तक कुल सात डीवीडी ही बिकी हैं।
हमने सोसायटी की वेबसाइट पर जाकर एक भी डीवीडी न बिक पाने वाली पांचों फिल्मों को उनके नाम से सर्च किया तो पता चला कि बेवसाइट पर इनमें से चार फिल्में अपलोड ही नहीं हैं।

सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म की डीवीडी भी नहीं बेच सकी सोसायटी
देहरादून। एक फिल्म ‘छुटकन की महाभारत’ वर्ष 2005 में बनी हुई बताई गई है। जबकि वेबसाइट में इस फिल्म का निर्माण 2006 में हुआ दिखाया गया है। इस फिल्म की भी सोसायटी एक भी डीवीडी नहीं बेच सकी। जबकि वेबसाइट की जानकारी के अनुसार इस फिल्म को 52वें नेशनल फिल्म अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का अवार्ड मिला बताया गया है। फिल्म के निर्देशक संकल्प मेश्राम है।

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