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विनोद कुमार सुमन डीएम नैनीताल।

नैनीताल:पटवारियों ने पुलिस कार्य करना छोड़ा, राजस्व क्षेत्रों में बढ़ सकते हैं अपराध

नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 12 जनवरी 2018 को एक आदेश पारित कर छह माह बाद राज्य में पटवारियों से रेगुलर पुलिस का काम न लेने के आदेश जारी किये थे। यह समय सीमा 12 जुलाई को समाप्त हो गई है। इसके साथ ही पटवारियों ने राजस्व क्षेत्रों में पुलिस कार्य करना छोड़ दिया है। अभी तक प्रशासन की ओर से कोई निर्णय नहीं लेने से आने वाले दिनों में राजस्व क्षेत्रों में अपराधों के होने की पूरी आशंका जताई जा रही है। छह माह पूर्व हाई कोर्ट के आदेश होने के बावजूद इन छह महीनों में सरकार ने राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में कानून व्यवस्था संभालने के पर्वतीय क्षेत्र में कानून व्यवस्था संभालने के कोई उपाय नहीं किये हैं और न ही पटवारियों को ही कोई दिशा निर्देश जारी किये। इस कारण 13 जुलाई से रेगुलर पुलिस का कार्य करना पटवारियों ने बंद कर दिया है। पर्वतीय राजस्व निरीक्षक संघ के जिलाध्यक्ष कैलाश चन्द्र ने कहा है कि इस संबंध में जिला प्रशासन को पत्र भेज दिया है। हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना होने की दशा में फिलहाल पुलिस कार्य नहीं किये जा रहे हंै।
यहां बता दें कि अदालती आदेशों के क्रम में यदि रेगुलर पुलिस का काम करते है तो यह अदालत के आदेश की अवमानना होती है और वह यह काम नहीं करेंगे तो पर्वतीय क्षेत्र की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी होगी। इस संदर्भ में पर्वतीय राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष को 12 जुलाई को ज्ञापन देकर दिशा-निर्देश देने की अपील की थी। इससे पूर्व 25 मई व 8 जून को भी राजस्व बोर्ड के समक्ष पत्राचार किया गया। जिनका कोई जवाब पटवारी संघ को नहीं मिला। राज्य में नौ पर्वतीय जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पटवारियों के पास है। इसके अलावा नैनीताल व देहरादून के पर्वतीय क्षेत्र के रेगुलर पुलिस का कार्य भी पटवारी ही करते हैं। शेष दो जिलों हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर में कानून व्यवस्था का कार्य रेगुलर पुलिस के पास है। पर्वतीय पटवारी संघ नैनीताल के पदाधिकारी पवन जोशी ने बताया कि 13 जुलाई से रेगुलर पुलिस के कार्य जिनमें एफआईआर दर्ज करने अपराधियों के चालान करने आदि मुख्य हैं जिनका संपादन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में सरकर से शीघ्र स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी कोई दिशा निर्देश जारी नहीं हुए हैं। ऐसी स्थिति में यदि कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

 

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 12 जनवरी 2018 को एक आदेश पारित कर छह माह बाद राज्य में पटवारियों से रेगुलर पुलिस का काम न लेने के आदेश जारी किये थे। यह समय सीमा 12 जुलाई 2018 को समाप्त हो गई है। राजस्व निरीक्षक संघ के जिलाध्यक्ष का जो पत्र प्राप्त हुआ है उसके मुताबिक कोर्ट के आदेशों के परिपालन में पटवारियों ने राजस्व क्षेत्रों में पुलिस कार्य करना छोड़ दिया है। इस संबंध में शासन को अवगत करा दिया गया है। शासन की ओर से दिशा निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जायेगी। इस संबंध में राजस्व अधिकारियों को राजस्व क्षेत्रों में कानून व्यवस्था पर नजर रखने को कहा गया है। -विनोद कुमार सुमन डीएम नैनीताल।

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