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पूर्व विधायक शहजाद सत्ताधारी विधायक प्रणव सिंह में नहीं चली दोस्ती

सरकार से नहीं मिल रहा चैम्पियन को सहयोग,  पूर्व विधायक को है एक काबिना मंत्री से आस
जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर सड़कों पर पहुंची लड़ाई से विकास कार्यों में आयी बाधा

विधायक कुंवर प्रणव सिंह

 

पूर्व विधायक शहजाद

रुड़की(मोहम्मद तहसीन) । जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर दो महीने पहले जनपद की राजनीति में आये उबाल के बाद एक बार फिर उबाल आ गया है। सरकार द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष को बर्खास्त करते हुए बनायी गयी संचालन समिति में कईं दिन पहले रार पैदा हो गयी। दो दुश्मनों को एक साथ कर बनी ये समिति इस हद तक पहुंच गयी है कि दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में तहरीर तक दे दी है। संचालन समिति पर सवाल उठाने के बाद सत्ताधारी पार्टी के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन अब अपनी ही सरकार के खिलाफ भी खड़े होते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि जिला पंचायत संचालन में उन्हें सरकार का साथ नहीं मिल रहा है।
गौरतलब है कि दो महीने पहले राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप को सही बताते हुए निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षा किसान आयोग के राज्य अध्यक्ष चैधरी राजेंद्र सिंह की भाभी को पद से बर्खास्त कर दिया था। बताते चले कि जनपद के काबिना मंत्री मदन कौशिक से नजदीकियों के चलते पूर्व विधायक हाजी मोहम्मद शहजाद ने अपनी पुरानी दुश्मनी को किसान आयोग के अध्यक्ष चैधरी राजेंद्र सिंह से पूरा करने के लिये गोटियां फीट की थी। इसमें दिलचस्प यह था कि पूर्व विधायक शहजाद के ध्रुव विरोधी भाजपा विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन भी शामिल थे। दोनों का एक साथ खडा होना इस बात का सुबूत था कि दोनों की चैधरी राजेंद्र सिंह से दुश्मनी है। लेकिन एक साथ चलना किसी के गले नहीं उतर रहा था। जिपं अध्यक्षा सविता की बर्खास्तगी के बाद पूर्व विधायक के भाई सत्तार, विधायक कुंवर प्रणव की पत्नी रानी देवयानी व एक अन्य सदस्य अमिलाल वाल्मीकि को मिलाकर तीन सदस्य संचालन समिति गठित की गयी। बर्खास्तगी को लेकर पूर्व विधायक शहजाद जितने उत्साहित थे, उससे अधिक कहीं कुंवर प्रणव सिंह उत्साहित थे। जनपद में लगे होर्डिंग्स से प्रतीत होता था कि रानी देवयानी जिला पंचायत अध्यक्षा बन गयी हैं। कार्यालय में भी बकायदा रानी देवयानी उसी कुर्सी पर बैठती थीं जिस पर निर्वाचित अध्यक्ष बैठते हैं। कुल मिलाकर करीब सप्ताह पूर्व इस संचालन समिति में बिगाड़ पैदा हो गया। कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन के जहां अपने तर्क हंै, वहीं पूर्व विधायक शहजाद के अपने तर्क हैं। स्थिति ये है कि इस रार के चलते जिला पंचायत से होने वाले जनपद के विकास पर असर पड़ रहा है। कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन ने जहां संचालन समिति के दोनों सदस्यों के खिलाफ मोर्चा खोला था अब उन्होंने सरकार में अपनी बात बनती ना देख सरकार के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर अपनी पत्नी के आसीन आज से नहीं बल्कि लम्बे समय से देखना चाहते आ रहे हैं। अलबत्ता परिस्थितियां ऐसा पैदा होती है कि उनका यह सपना पूरा नहीं हो रहा है। अब आस जगी थी, तो फिर बिगाड़ पैदा होता दिख रहा है।
दिल के अरमां आंसुओं में बह गये पंक्ति चैम्पियन पर बैठ रही सटीक, हो रही चर्चा
दिल के अरमां आंसुओं में बह गए, हम वफा करके भी तन्हा रह गये। उक्त पंक्ति खानपुर से विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन पर सटीक बैठती हैं। कांग्रेस में रहते रावत सरकार को गिराने में अहम योगदान अदा करने वाले चैम्पियन अब भाजपा से विधायक हैं। चार बार से विधायक चैम्पियन को त्रिवेंद्र सिंह सरकार के गठन के समय मंत्री बनने की उम्मीद थी। लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। चैम्पियन को ठेस पहुंची जरूर लेकिन वे चुप रहे। दो महीने पहले जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर सरकार द्वारा बर्खास्त की गयी जिला पंचायत अध्यक्षा सविता चैधरी के बाद उनकी पत्नी रानी देवयानी को जिला पंचायत संचालन समिति में सदस्य बनाया गया। उन्हें उम्मीद थी कि वह जिला पंचायत को अपने तरीके से संचालित करेंगे। लेकिन ऐसा हो ना सका। संचालन समिति को लेकर हुई रार से उन्हें जब सरकार से कोई सहयोग नहीं मिला तो उन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर उन्होंने कहा कि वे 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलकर शिकायत करेंगे। उन्होंने अपनी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़े किये। कहा कि मुख्यमंत्री को इसका जवाब देना पड़ेगा।

मंत्री-संत्री को नहीं हूं कुछ समझता, शेर था, शेर हूं
अपनी सरकार के मंत्रियों की बाबत कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन ने कहा कि मैं मंत्रियों-संत्रियों को क्या समझता हूं। यहां के मंत्री चैम्पियन के सामने कहां खड़े होंगे। मुझे मंत्री बनाये या ना बनाये। कोई फर्क नहीं पड़ता। चैम्पियन शेर है, शेर था और शेर ही रहेगा। चैम्पियन राज्य गठन के बाद से पहला चुनाव निर्दलीय के तौर पर जीते थे। लेनिक वे उस समय तिवारी सरकार में शामिल होकर कांग्रेस के हो गये थे। कांग्रेस में उन्हें जब-जब मौका मिला उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की। बहुगुणा सरकार के समय उन्होंने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को रजिया गुंड़ों में फंस गयी जैसे शब्द इस्तेमाल किये थे। जनपद के एक काबिना मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। जिसके चलते उन्हें अपना राज्यमंत्री का पद भी गंवाना पड़ा था। अब एक बार फिर ढके-छिपे ही सही जनपद के काबिना मंत्री के हस्तक्षेप से वे कहीं नाराज हैं, लेकिन खुलकर अभी कुछ उन्होंने बोला नहीं है।

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