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राजस्थान से आयी कॉल ने बदली कांग्रेस के मेयर टिकट की चाल

भाजपा के एक ‘बागी’ ने ली कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत की शरण

रुद्रपुर। कांग्रेस के मेयर टिकट की घोषणा भाजपा के एक संभावित बागी ने रुकवा दी है। माना जा रहा है कि रुद्रपुर मेयर पद के लिए घोषणा सोमवार तक टल सकती है। इधर, कांग्रेस में बेचैनी सा माहौल है। कांग्रेस में मेयर पद के लिए नंदलाल व सुनील आर्या में निर्णायक लड़ाई चल रही थी। इसमें नंदलाल का पलड़ा भारी माना जा रहा है लेकिन इस लड़ाई को एक भाजपा नेता ने रोचक बना दिया है। भाजपा से ये नेता प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। नजूल फैसला आने से पहले ये नेता खुलकर दावा कर रहा था कि टिकट उसी को मिलेगा। जिले के एक विधायक भी इस नेता की खुलकर पैरवी में उतरे हुए थे लेकिन भाजपा ने संघ पृष्ठभूमि वाले रामपाल सिंह पर भरोसा जता दिया। इससे ये नेता विद्रोही तेवर में आ गए हैं। दिल्ली में डेरा डालकर इन नेता ने अपनी बिरादरी के राजस्थान के कांग्रेस नेता के मार्फत पार्टी महासचिव अशोक गहलोत के दरबार में हाजिरी लगाई है। गहलोत के निर्देश पर उत्तराखंड के पार्टी नेतृत्व ने रुद्रपुर के स्थानीय नेतृत्व के पास इस नेता को भेजा है। कहा जा रहा है कि इस वजह से रुद्रपुर मेयर पद के दावेदारी का मामला रविवार को टल सकता है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस नेता को लेकर स्थानीय नेतृत्व ने नाराजगी जताते हुए आलाकमान को बता दिया है लेकिन प्रांतीय नेतृत्व ने आधी रात को स्थानीय नेताओं को फोन कर इस नेता की बात सुनने को कहा है। इस वजह से इस नेता ने रविवार को तडक़े से कांग्रेस नेताओं की परिक्रमा शुरू कर दी है। यहां बता दें कि ये नेता पहले भी कांगे्रस में रह चुके हैं। इसके चलते इनको उम्मीद है कि कांग्रेस में उनके लिए अभी गुंजाइश बाकी है। इधर, इसकी भनक लगते ही कांग्रेस के दावेदार नंदलाल व सुनील आर्या ने भी एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। इन नेताजी का पूरा बायोडाटा निकाल कर बता दिया है कि भाजपा में रहते हुए इन्होंने कांग्रेस की जड़ों पर मठ्ठा डालने का काम किया है। फिलहाल कांग्रेस में टिकट की घोषणा न होने से मायूसी छाई हुई है।

 

 

 

‘राम’ पर ही भाजपा ने जताया विश्वास
रुद्रपुर। भाजपा का टिकट फाइनल होने से पार्टीजनों में खुशी का माहौल है। जो दावेदार नाखुश है उनकी परवाह किये बगैर पार्टीजन उत्साह से लबरेज हैं। रामपाल ने भी शनिवार देर रात से ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व संघ से जुड़े लोगों का आशीर्वाद लेना शुरू कर दिया।
रुद्रपुर में भाजपा के लिए टिकट दावेदारों की संख्या ज्यादा थी। मारामारी भी भाजपा में ही ज्यादा दिख रही थी। गई गुटों में बंटी भाजपा के क्षत्रप अपने-अपने गुटों को दावेदारी करा रहे थे। अंतिम दौर में भाजपा की ओर से रामपाल सिंह, तरुण तेजपाल, अंकित चंद्रा व शैलेंद्र कोली के नाम ही रह गये थे। तरुण तेजपाल, अंकित चंद्रा विधायक राजकुमार ठुकराल गुट के माने जा रहे थे। जबकि शैलेंद्र को जिलाध्यक्ष गुट का माना जा रहा है। रामपाल सिंह को शहर में गुटबाजी से परे माना जाता है। रामपाल का नाम आरएसएस लॉबी ने आगे बढ़ाया। इसी के चलते रामपाल का नाम तेजी से आगे चला। आरएसएस का नाम होने की वजह से भाजपा के सभी गुट इस नाम पर सहमत हो गये। गुरुवार को आरएसएस के प्रांत प्रचारक युद्धवीर सिंह शहर में थे। उन्होंने भी दावेदारों को लेकर फीडबैक लिया। माना जा रहा है कि इसके बाद ही तकरीबन तय हो गया था कि रामपाल पर ही भाजपा अपना दांव लगायेगी। ‘सांध्य दैनिक उत्तराचंल दीप’ ने शुक्रवार के अंक में ही बता दिया कि रामपाल ही भाजपा के उम्मीदवार होंगे। शनिवार को रामपाल के नाम की घोषणा होते ही भाजपाइयों के चेहरे खिल गये। रामपाल ने भी अपनी एलआईसी की नौकरी छोड़ दी।

 

 

 
भाजपा ने तमाम छलनी लगाकर रामपाल सिंह को उम्मीदवार घोषित किया है। रामपाल के नेतृत्व में पार्टी निगम पर फिर से झंडा फहरायेगी। शहर का विधायक व पार्टी कार्यकर्ता होने के नाते मैं अपनी पूरी ताकत से रामपाल को चुनाव लड़ाऊंगा। मुझे पूरी उम्मीद है कि रामपाल सिंह हजारों वोट से जीतकर रुद्रपुर नगर निगम के मेयर पद पर विराजमान होंगे।
– राजकुमार ठुकराल, विधायक

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