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लो मोमीनो माहे रमजान आ गया…

खुदा की खास इबादत का पाक महीना शुरू
सलीम खान, हल्द्वानी। उमस व चिलचिलाती धूप की गर्मी में रमजान का बेसग्री से इंतजार खत्म हुआ और चांद की हल्की सी झलक ने दस्तक दे दी कि माहे रमजान का आ गया है। रमजान इबादत का महीना है। अपने गुनाहों की माफी के लिए चार हफ्तों का ऐसा पाक सफर है जिसमें किसी मुसलमान के जिस्म का हर अंग इबादत में मशगूल होता है। यूं तो रोजा कुछ न खा पीकर अल्लाह की सच्चे मन से इबादत करने का नाम है पर इसके पीछे कई नसीहतें होती हैं कि रोजा रखकर एक मुसलमान अल्लाह को दिल की गहराइयों से याद करे वो भूखा रहकर किसी भूखे की हालत को समझ सके। इसलिए रमजान मुबारक में खैरात, जकात की ताकीद की गई है। रोजा नाम इंसान के अपनी नफ्स यानि इंद्रियों को काबू करने का भी नाम है। एक रोजेदार किसी औरत को बुरी निगाह से न देखे वरना उसका रोजा मकरूब यानि खराब हो जाएगा। यानि नजर का भी रोजा होता है। उसके हाथों पराई चीज महफूज रहे यानि उसके हाथों का रोजा उसके कदम बुरी जगह न जाएं। उसकी जुबान किसी की बदी न कर अल्लाह का जिक्र करे, उसके कान अच्छा सुनें, उसकी आंखें अच्छा देखें, उसका बदन पाक रहकर अपने गद की इबादत में हो, बस यही एक रोजेदार का रोजा मुकम्मल होने की शर्त है और यही इस पवित्र महीने का मकसद है। इसी पाक महीने में अल्लाह की अजीम किताब कुराने पाक मुकम्मल हुआ। पूरे रमजान मुसलमान कुरआने-पाक के तीसों पारे पढ़कर नमाज पांचों वक्त अता करे और खैरात, जकात के साथ अपनी नफ्ज को साधते हुए इबादत करते हैं। इस इबादत का मकसद एक मुसलमान को उसके फर्ज याद दिलाकर उसके दिल में अपने रब के लिए मोहब्बत को शादाब बनाए रखना होता है। साथ ही समाज और लोगों के लिए जो फर्ज होते हैं उनकी अदायगी भी इस पाक माह में होती है।

 
बाजारों में सजे पकवान
अफ्तार में खजूर और दूसरे पकवानों के साथ आम भी जायका बढ़ाएगा। इसके अलावा भी लीची, मौसमी, रूअब्जा आदि भी दफ्तर खान की रौनक होंगे। साथ ही पहाड़ों की सौगात कहलाने वाले आड़ू, पुलम, खुमानी के साथ दुकानों पर खजूर और रूअपफ्जा की बिक्री भी बढ़ गई है। साथ ही ब्रेड पकौड़ा, पकौड़ी व समोसे का भी इस माह में अपना मजा है।

 

मुस्लिम इलाके हुए गुलजार
रमजान के इस्तकबाल में मुस्लिम इलाके गुलजार हो गए हैं। मस्जिदों व खानखाओं को दूधिया रोशनी से रोशन किया गया है। शुक्रवार की तड़के 3.45 मिनट पर पहला रोजा शुरू हो चुका है। अफ्तार 6.59 बजे होगा। इस तरह करीब 14 घंटे 44 मिनट यानि की पौने 15 घंटे भूखे प्यासे रहकर रोजदार परवरदिगार की इबादत करेंगे।

मस्जिदों में बढ़ी नमाजियों की तादाद
गुरुवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने चांद देखकर मस्जिदों में ईशा की नमाज के बाद तराबी नमाज अता की। तराबी नमाज मदरसों, मैरिज हॉलों व मुस्लिम समुदाय के लोगों के घरों में भी एकत्र होकर अता की गई। कई जगहों पर तराबी 11 दिन के लिए शुरू हुई है। मस्जिदों में अधिकतर तराबी नमाज 25 दिन तक शुरू हुई है। रमजान का चांद देखते ही मस्जिदों में भी नमाजियों की तादाद बढ़ गई है। मस्जिद व मदरसे नमाजियों से भरे दिखाई दे रहे हैं।

 

12 साल के यासिर ने रखा रोजा
12 साल की उम्र में मदरसा इशादुल हक में पढऩे वाले मोहम्मद यासिर ने कुरान हिब्ज करके पहली बार किदवई नगर में हाफिज आफताब के घर में कुरान सुनना शुरू किया है। 12 साल के मोहम्मद यासिर का यह जब्जा देखकर मुस्लिम समुदाय के लोग गद्गद हो उठे। यह बात मदरसा इशादुल हक के खादिम उवैस खान ने बताई। उन्होंने बताया कि मोहम्मद यासिर का पिछले वर्ष दस्तार बंदी की गई थी। जहां यासिर कुरान हाफिज बन गया था। वहीं हाफिज होने के नाते अब यासिर तराबी नमाज में कुरान सुन रहा है। उनका कहना है कि अगले रमजानों में यासिर मदरसा इशादुल हक में तराबी नमाज अता कराएगा।

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