Breaking News
Home / Breaking News / रुद्रपुर: ‘सामान्य’ सीट पर टिकीं कांग्रेस की उम्मीदें

रुद्रपुर: ‘सामान्य’ सीट पर टिकीं कांग्रेस की उम्मीदें

मेयर सीट आरक्षित होने की स्थिति में पार्टी के पास दावेदारों का ‘अकाल’

अभिषेक आनंद, रुद्रपुर। शहर की संसद पर कब्जे को लेकर एक तरफ भाजपा में होड़ मची हुई है तो दूसरी ओर कांग्रेस में एक तरह से ‘सन्नाटा’ पसरा है। यूं कहें कि कांगे्रस की सारी उम्मीदें सीट के सामान्य होने की संभावनाओं पर ही टिकी हैं। कांग्रेस को आरक्षित सीट पर दावेदार ही नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में पार्टी के नेताओं में बेचैनी होना स्वाभाविक है।
रुद्रपुर की मिनी संसद पर ‘राज’  के मामले में कांगे्रस का रिकॉर्ड बेहतर हैं। कांग्रेस की ओर से नसरीन कुरैशी व मीना शर्मा के रूप में दो महिला कद्दावर नेत्रियों ने रुद्रपुर में हाल के वर्षों में हुए निकाय चुनाव में जीत हासिल की। नगर निगम के पहले चुनाव में जब सीट अनुसूचित जाति महिला के खाते में गई तो अनजान से चेहरे के रूप में कांग्रेस प्रत्याशी ममता रानी ने भी दमदार तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ममता करीब साढ़े तीन हजार वोटों से शहर में कांग्रेस का परचम लहराने से पीछे रह गईं। पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ की लगातार दो चुनाव में हार के बाद से पार्टी कुछ कमजोर सी नजर आ रही है। फिलवक्त कांग्रेस की ओर से मीना शर्मा, सुशील गाबा ही मजबूती से मेयर पद के लिए दावेदारी करते नजर आ रहे हैं। होली के त्योहार पर शुभकामना संदेश देते पूर्व प्रत्याशी ममता रानी के फ्लैक्सी भी शहर में एकाएक नजर आए तो लग रहा है कि ममता भी चुनाव लडऩे की इच्छुक हैं। हां, ये बात जरूर है कि वे चुनाव हारने के बाद से सक्रिय नहीं रही हैं। इन तीनों के अलावा शहर में फिलहाल किसी कांग्रेसी की मेयर पद के लिए दावेदारी सामने नहीं आ रही है। चूंकि अनुसूचित जाति महिला के लिए 2013 में सीट आरक्षित रही, इसलिए इस बार इसकी संभावनाएं कम ही हैं। सामान्य सीट के लिए दो ही दावेदार हैं। जबकि ओबीसी सीट आरक्षित होने की स्थिति में शहर में कांग्रेस के पास किसी अनजान चेहरे को लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हां, इतना जरूर है कि सामान्य सीट पर कांग्रेस की संभावनाएं ज्यादा प्रबल नजर आ रही हैं। पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा ने पिछले पांच साल में अपनी सक्रियता से खुद की दावेदारी को पुख्ता कर रखा है। माना ये जा रहा हैकि वे सामान्य सीट पर कांग्रेस की नैया को पार लगा सकती हैं।

 
परिसीमन ने बिगाड़ा कांगे्रस का गणित!
शहर में चर्चा ये भी है कि परिसीमन के बाद निगम में शामिल किए गए क्षेत्र ने कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ दिया है। रुद्रपुर में कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाले मुस्लिम वोटर इस परिसीमन के बाद कम हुए हैं। ऐसे में कांग्रेसियों का मानना है कि शहर से लगती कालोनियों में पार्टी की स्थिति अनुकूल नहीं रही। इसी के चलते कांगे्रस में दावेदारों की संख्या ज्यादा सामने नहीं आ रही है। यूं कहें कि आरक्षित श्रेणी में आने वाले कांग्रेस के नेता मेयर चुनाव में उतरने का साहस ही नहीं जुटा पा रहे हैं। इसी वजह से मेयर सीट आरक्षित होने की चर्चाओं का कांग्रेस ज्यादा विरोध करती नजर आ रही हैं।

 
बेहड़ का ‘आशीर्वाद’  ही तय करेगा टिकट
भले ही पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ दो बार से चुनाव हार रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनका रुतबा कम नहीं हो रहा हैं। ये बात तय है कि मेयर सीट के लिए प्रत्याशी चयन में पूर्व मंत्री की पसंद को कांग्रेस हाईकमान नकार नहीं सकेगा। नजूल नीति को लेकर बेहड़ ने विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर दिखा दिया है कि रुद्रपुर में वे ही कांग्रेस के खेवनहार हैं। ऐसे में तय है कि बेहड़ का ‘आशीर्वाद’ ही तय करेगा कि टिकट किसे मिलेगा। मेयर से लेकर पार्षदों के टिकट ‘आवास विकास’ से ही तय होंगे।

 

 

‘हम लोग पूरी शिद्दत से चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। प्रत्याशी कौन होगा ये विषय नहीं है। कांगे्रस को हर हाल में चुनाव जिताने को हर कार्यकर्ता ने कमर कस ली है। हम पिछले दो महीने से शहर के सभी 40 वार्डों में घूम रहे हैं। बूथ स्तर का प्रबंध हो चुका है। ऐसे में पार्टी जिसे भी टिकट देगी, कार्यकर्ता उसे चुनाव लड़ाएंगेे। हमारा संगठन इतना मजबूत है कि किसी कार्यकर्ता को भी हम अपने सिंबल पर चुनाव जिता लेंगे। भाजपा सरकार की विफलताओं ने हमारे लिए स्थितियां और भी ज्यादा अनुकूल कर दी हंैÓ।
– जगदीश तनेजा, महानगर अध्यक्ष, कांग्रेस

About saket aggarwal

Check Also

महाराष्ट्र: किसानों को कर्ज देने में हुई देरी, बैंकों पर कार्रवाई

मुंबई (एजेंसी)। महाराष्ट्र सरकार की ओर से किसानों की कर्ज माफी की घोषणा किए एक …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *