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गोमुख: जहां है आध्यात्म और प्रकृति का संगम

हल्द्वानी। देवभूमि उत्तराखंड में साक्षात देवताओं का वास है। यहां पर हिंदू धर्म की पवित्र नदी गंगा नदी का उद्गम स्थल है जिसे गोमुख के नाम से जाना जाता है। किसी भी हिंदू के लिये जीवन में एक बार गोमुख के दर्शन कर लेना बहुत ही सौभाग्यशाली होता है।
गोमुख एक खूबसूरत जगह है जो गंगोत्री ग्लेश्यिर के अंत में चिन्ह्ति है। यह उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यह जगह शिवलिंग पीक के नजदीक स्थित है जो अपनी चुनौतीपूर्ण चढ़ाई ट्रेल्स के लिए जानी जाती है। भागीरथी नदी, गंगा नदी की एक सहायक स्त्रोत है जो गोमुख से निकलती है। यह जगह तपोवन मिडाउ यानि घास के मैदान के पास स्थित है और यहां आकर पर्यटक, प्रकृति के सुंदर नजारों को निहार सकते हैं। गोमुख के आस पास के स्थान पर्यटक, गोमुख में आकर विभिन्न आकर्षण देख सकते हैं और यहां का गंगोत्री ग्लेश्यिर इनमें से प्रमुख है। यह हिमालय क्षेत्र के सबसे बड़े ग्लेश्यिरों में से एक है और चारों तरफ से शिवलिंग, थालय सागर, मेरू और भागीरथी तृतीय की बर्फ ढकी पहाडियों से घिरा हुआ है। इस ग्लेश्यिर का टर्मिनल प्वाइंट एक गाय के मुंह जैसा दिखता है, इसी कारण इस जगह को गोमुख के नाम से जाना जाता है। यह जगह पर्यटकों के लिए विशेष ट्रैकिंग के अवसर प्रदान करती है। लोकप्रिय ट्रैकिंग रूट यानि रास्ता गंगोत्री से शुरू होता है और गीला पहाड़ और चिरबासा से होकर गुजरता है। यह भूस्खलन और कठिन ढलानों वाला चुनौतीपूर्ण रास्ता है। तपोवन और नंदनवन के लिए भी ट्रैकिंग का रास्ता गोमुख से शुरू होता है। गोमुख कैसे जाएं पर्यटक यहां तक देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे से पहुंच सकते हैं। यहां आने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन हरिद्धार का है जो गंगोत्री से मात्र 230 किमी. की दूरी पर स्थित है। आसपास के शहरों से भी यहां के लिए कई बसें उपलब्ध हैं। गोमुख जाने का सबसे अच्छा समय गोमुख आने वाले पर्यटकों को गर्मियों के दौरान यात्रा करने का प्लान बनाना चाहिए।

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