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संघर्श से पाई मंजिल, अब औरों का बनी सहारा

समाज सेवा में भी पीछे नहीं एसआई सरोज कोहली
चार बेटियों की पढ़ाई और खान-पान का उठा रही खर्च
कोटद्वार। उत्तराखंड पुलिस की युवा महिला एसआई सरोज कोहली ड्यूटी के लिए तत्पर रहने के साथ ही समाज सेवा में भी पीछे नहीं हैं। कड़े संघर्श के बाद उन्होंने पहले खुद को आर्थिक तौर पर मजबूत किया और अब सब इंस्पेक्टर बन कर चार बेटियों का सहारा बन गई है। संषर्षशील व्यक्तित्व की धनी सरोज न सिर्फ इन चार बेटियों की प्रारम्भिक शिक्षा की व्यवस्था कर रही है बल्कि इनके खान-पान की जिम्मेदारी भी उठा रही है। नर्सरी से कक्षा पांचवीं में पढ़ रहीं ये बच्चियां हरिद्वार, हल्द्वानी और देहरादून की रहने वाली है।
महज 17 साल की उम्र में साल 2005 में गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने वाली सरोज ने अपने जीवन काल में बेहद तकलीफें उठाई हैं। हालांकि माता-पिता के हौसले ने सरोज के आत्मविश्वास को कमजोर नहीं होने दिया और शादी के बाद भी उसने आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए पोस्ट आफिस में सरकारी नौकरी पाई। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की पैरोकार सरोज कन्या भ्रूण हत्या के सख्त खिलाफ है। एक मुलाकात में सब इंस्पेक्टर सरोज ने बताया कि बचपन से ही पढ़ाई में होनहार थी इसलिए माता-पिता ने भी हरसंभव सपोर्ट किया। उन्होंने बताया कि शादी के चार साल बाद बेटी का जन्म हुआ। गृहस्थ जीवन में दिक्कतें होने के कारण उन्होंने पीसीएस के साथ ही पुलिस की दरोगा भर्ती के लिए एप्लाई किया। पीसीएस प्री क्लीयर होने के साथ ही उनका सेलेक्शन सब इंस्पेक्टर के लिए हो गया। लेकिन पुलिस ट्रेनिंग के चलते पीसीएस मेन्स क्वालीफाई नहीं हो सका।
सरोज का मानना है कि आज के आधुनिक युग में भी बेटियों के साथ अत्याचार में कमी नहीं आई है। लेकिन अगर हौसले और लगन से बेटियां आगे बढऩे की ठान ले तो वे किसी भी काम में पीछे नहीं है। बताया कि भविष्य में उनका उद्देश्य निर्धन, अनाथ व दिव्यांग बेटियों के लिए हास्टल का निर्माण कर उन्हें अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना है। जिससे बेटियों को समाज में वो सम्मान मिल सके जिसकी वह हकदार हैं।

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