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डिमांड रूके तो रीढ़ टूटेगी नशे के कारोबार की : एसएसपी नैनीताल

नैनीताल जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मीणा मंगलवार को उत्तरांचल दीप की साक्षात्कार श्रृंखला विशेष में हमसे रूबरू हुए। उन्होंने नैनीताल जिले के लिए अपनी प्राथमिकताओं पर बात की और जिले में कानून व्यवस्था लागू करने की नई योजनाओं के बारे में बताया।

प्रश्न: नैनीताल जिले में एसएसपी पद सभांलने के कुछ दिन तक आप शांत रहे लेकिन अब आपकी फार्म दिखने लगी है। क्या किया इतने दिन?
उत्तर: नहीं कुछ ज्यादा नहीं… थोड़ा नैनीताल के माहौल को समझने का प्रयास किया। अपने अधिकारियों व कर्मचारियों को समझने का काम किया और फिर काम शुरू किया।

 

प्रश्न: क्या प्राथमिकताएं तय कीं जिले की पुलिस के लिए… ?
उत्तर: देखिए पहली बात तो यह कि मैं नैनीताल के लिए नया नहीं हूं, कम से कम सात आठ महीने पहलो यहां अपनी सेवाएं दे चुका हूं…पहले यहां नशे के नाम पर चरस और गांजे का व्यापार होता था, युवा थिनर और आयोडेक्स जैसे नशे के विकल्प तलाशते थे, लेकिन अब स्मैक और दूसरे दूसरे महंगे नशे ने युवाओं को बांध लिया है। हमारी कोशिश यह है कि नशे की डिमांड साइड पर ध्यान दें, नशे के कारोबार की कमर तोडऩी है तो डिमांड रोकनी पड़ेगी, इसके लिए कुछ रचनात्मक प्रयास शुरू किए हैं…नतीजे धीरे-धीरे सामने आएंगे… ऐसा ही हाल यहां की यातायात व्यवस्था का है, पहले यहां की सडक़ों पर वाहन कम थे, लेकिन अब सडक़ों पर चलने के लिए जगह ही नहीं है…हमें यातायात व्यस्था सुचारू करने के लिए नए नियम बनाने हैं, पार्किंग की समस्या का समाधान खोजना है…अन वर्कआउट केसों को प्राथमिकता के आधार पर खोलना है।

 

प्रश्न: जी….ऐसा ही एक मामला है गोरापड़ाव का पूनम हत्याकांड… इस मामले में कुछ संदिग्धों को लाई डिटेक्टर टेस्ट भी हो चुका है…क्या उम्मीद है?
उत्तर: उम्मीद तो बहुत कुछ है…लेकिन अभी टेस्ट रिपोर्ट हमें नहीं मिली है…उम्मीद है इस रिपोर्ट के बाद किसी और को इस टेस्ट के दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा, लेकिन रिपोर्ट में हमें सच्चाई का पता न चला तो कुछ और संदिग्धों के लाई डिटेक्टर टेस्ट कराए जा सकते हैं। कुल मिला कर जल्दी ही इस हत्याकांड से पुलिस पर्दा उठा देेगी।

 

प्रश्न: पुलिस की छवि आम जनता के लिए लाख दावों के बावजूद मित्र जैसी नहीं बन पाई…क्या सोचा है ?
उत्तर: यह बात पूरी तरह से सत्य नहीं है…पुलिस की छवि बदली है लेकिन शत प्रतिशत नहीं बदल सकी है यह मेरा भी मानना है…हमारे दिमाग में कुछ प्लान हैं इसके लिए…हम हर थाने में सब इंस्पेक्टर रैंक के एक अधिकारी को तैनात करना चाहते हैं जो लोगों से उनकी समस्या के बारे में जानकर पुलिस की कार्रवाई में उनकी मदद कर सके…इससे पुलिस की छवि भी सुधरेगी और लोग पुलिस को मित्र के रूप में देखना पसंद करेंगे।

 

प्रश्न: रूडक़ी में कच्ची शराब कांड के बाद नैनीताल पुलिस ने यहां के जंगलों में शराब की भट्ठियों को पकडऩे का क्रम शुरू किया जो अभी थमा नहीं है, इतनी भट्टियां यहां चल रही थीं और पुलिस को पता ही नहीं था ?
उत्तर: देखिए …यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। पहले भी छापेमारी होती रही है। आगे भी चल रही है…रुडक़ी कांड के बाद पुलिस ने लगातार कार्रवाई की है… इसके लिए सख्त कानून बनाने आवश्यकता है माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि अब कच्ची शराब रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाएगा…नतीजे सामने आएंगे जल्द ही…

 

प्रश्न: पुलिस कर्मियों में तनाव को लेकर कोई न कोई हादसे पेश आते रहे हैं…नैनीताल जिले में तैनात पुलिस कर्मियों को डिप्रेशन से बचाने के लिए कोई कार्ययोजना?
उत्तर: ऐसी घटनाएं दुखद हैं लेकिन यह भी सच है कि उत्तराखंड पुलिस दूसरे राज्यों की पुलिस से कहीं ज्यादा सुविधाजनक माहौल में काम करती है…तनाव पारिवारिक स्तर पर भी हो सकता है…लेकिन हाल ही में हुए मामले में यह भी साफ हो चुका है कि अधिकारी ने उस कर्मचारी की काउंसलिंग करवाई थी। फिर भी योग और मेडिकल के माध्यम से कर्मचारियों को तनाव मुक्त रखने का प्रयास किया जाएगा। आपको एक बात बताऊं उत्तराखंड में तो हम जैसे अधिकारी तो सहज सुलभ हैं ही हमारे डीजीपी भी मिस कॉल का पलट का जवाब देते हैं…कर्मचारियों को इससे बेहतर माहौल और कहां मिलेगा।अमूमन देखा गया है कि कर्मचारियों की कम छुटिï्टयां डिप्रेशन बढ़ाने का मुख्य कारण होता है…लेकिन यहां किसी कर्मचारी को छुट्ट्टïी न मिले ऐसा नहीं देखा गया है

 

प्रश्न: नैनीताल जिले में स्टाफ की क्या स्थिति है?
उत्तर: हमारे पास पर्याप्त पुलिस बल है…आवश्यकता पडऩे पर पीएसी भी है….सीपीयू है… होमगार्ड है…

 

प्रश्न: इन दिनों सीपीयू कुछ ढीली पड़ी दिख रही है?
उत्तर: यह बात सही है कि गोरापड़ाव कांड के बाद सीपीयू की कुछ टीमों को दिन की डय़ूटी से हटाकर रात के समय नाकेबंदी पर तैनात किया गया था। अब स्थिति में बदलाव आया है, कुछ दिनों में सीपीयू दोबारा सडक़ों पर दिखाई देगी…सीपीयू को लोगों ने काफी सहयोग किया है…आगे भी यही उम्मीद है…

 

प्रश्न: कहते है खाकी पर खादी का ज्यादा दबाव रहता है, कितनी सच है यह बात ?
उत्तर: कम से कम उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में यह बात सही नहीं है…यहां ज्यादा मामले चालान, बदमिजाजी की शिकायतों के आते हैं…इसमें कोई दबाव जैसी स्थिति नहीं होती…यह हर रोज की प्रक्रिया है…

 

प्रश्न: नैनीताल में क्या करना चाहते हैं जिससे जनता याद रखे ?
उत्तर: हम पब्लिक सर्वेंंट हैं कोई राजनेता नहीं, अगला अधिकारी हमसे बेहतर काम करे यही हमेशा सोचते हैं।

 

और यह भी…

 

प्रश्न: सीपीयू ने हल्द्वानी की यातायात व्यवस्था को सुधारने में अच्छा काम किया, लेकिन एक सवाल बार बार पूछा जाता है कि सीपीयू वनभूलपुरा में क्यों नहीं पहुंचती?
उत्तर: ऐसा है…तो पहुंच जाएगी सीपीयू वनभूलपुरा भी…(हंसते हुए), दरअसल अभी सीपीयू को रात की ड्यूटी पर लगाया गया है। अब उसे रात से फ्री करके फिर से सडक़ पर उतारा जाएगा, देखियेगा क्या क्या होता है।

 

प्रश्न: लोकसभा चुनाव की क्या तैयारी है आपकी ओर से?
उत्तर: यहां कोई ऐसा राजनैतिक माहौल नहीं है, फिर भी हम अपनी ओर से कोई कोर कसर नहीं छोडऩा चाहते। हमने अतिरिक्त बल मांगा है, समय पर मिल जाएगा।

 

प्रश्न: संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों में इजाफा हुआ है क्या?
उत्तर: सॉरी चुनाव आयोग ने इस बार साफ हिदायत दी है कि संवेदनशील, अति संवेदनशील बूथों और ऐसे ही चुनाव से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर मीडिया से कोई चर्चा न की जाए। फिर भी हम कहना चाहते हैं कि चुनाव लोकतांत्रिक माहौल में शांति पूर्वक संपन्न कराए जाएगें। किसी को भी चुनाव के दौरान कानून तोडऩे का अधिकार नहीं दिया जाएगा।

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