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फाइटर एयरक्राफ्ट सुखोई ने दून एयरपोर्ट पर इतिहास रचा

 

2 दिन के ट्रायल के बाद सफलतापूर्वक उतरा सुखोई एमकेआई विमान

चंद्रमोहन कोठियाल, डोईवाला। भारतीय वायु सेना के अग्रणी पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट सुखोई 30 एमकेआई विमानों ने दून एयरपोर्ट पर 2 दिनों के ट्रायल के बाद शनिवार को सफलतापूर्वक लैंडिंग कर इतिहास रच दिया।

वायु सेना के सुखोई 30 एमकेआई एयरक्राफ्ट सबसे पहले बृहस्पतिवार के दिन देहरादून के आसमान में ट्रायल के लिए पहुंचे थे। उसके बाद सुखोई विमानों ने शुक्रवार को भी देहरादून के आसमान में कलाबाजियां खाते हुए उड़ान भरी थी। लेकिन मिस एप्रोस के बाद बिना लैंडिंग के सुखोई विमान वापस लौट गए थे। पर शनिवार 17 फरवरी 2018 का दिन उत्तराखंड के हवाई इतिहास में मिल का पत्थर साबित हुआ। शनिवार को सुबह 12:10 मिनट पर भारी गर्जना के साथ 2 सुखोई विमानों ने एयरपोर्ट के रनवे पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की। फिलहाल दोनों विमानों को एयरपोर्ट के अंदर कड़ी सुरक्षा में रखा गया है।

डोकलम में चीन के साथ भारी विवाद और उत्तराखंड की सीमा में चीन की लगातार घुसपैठ के कारण सुखोई 30 एमकेआई एयरक्राफ्ट को देहरादून एयरपोर्ट पर उतारा गया है। और इस बात की पूरी संभावनाएं हैं कि सुखोई विमानों को उत्तराखंड की सीमाओं पर चीन की चालाकी रोकने के लिए तैनात किया जा सकता है। स्वदेशी तकनीक और ब्रहमोस क्रूज मिसाइल से लैस सुखोई 30 एमकेआई को आसमान का बादशाह माना जाता है। ये विमान आवाज से दोगुनो से भी अधिक स्पीड से दुश्मन पर हमला करने में सक्षम है। सेटेलाइट नेविगेशन, रेडियो नेविगेशन और ऑटोमेटिक फ्लाइट सिस्टम से लैस सुखोई एयरक्राफ्ट किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है। दो वर्ष पहले वायु सेना हरक्यूलिस और सी’17 ग्लोबमास्टर को भी दून एयरपोर्ट पर सफलतापूर्वक उतार चुकी है।

 

सुखोई 30 एयरक्राफ्ट की ये हैं खूबियां

डोईवाला। 2002 में भारत को पहला सुखोई विमान रूस से प्राप्त हुआ था। लेकिन अब सुखोई विमानों को रूस के सहयोग से भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल द्वारा निर्मित किया जा रहा है। वर्तमान में भारत के पास 272 के लगभग सुखोई एयरक्राफ्ट हैं। सुखोई को हरफनमोला एयरक्राफ्ट माना जाता है। भारत इन विमानों को चीन की चालाकी का जवाब देने के लिए अरूणाचल प्रदेश के पासीघाट में पहले ही तैनात कर चुका है। भारत सुखोई से बंगाल की खाड़ी में ब्रहमोस क्रूज मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण कर सुखोई को इन मिसाइलों से लैस कर चुका है। इस बार में 3 हजार किलोमीटर तक उड़ान भरने में सक्षम और हवा में ही ईंधन भरने की खूबी इस एयरक्राफ्ट को बहुत खतरनाक बनाते हैं। 2.5 टन वजनी और 400 किलोमीटर तक मार करने वाली ब्रहमोस क्रूज मिसाइल से ये एयरक्राफ्ट दुनिया के किसी भी कोने में तबाही मचाने में सक्षम है।

 

सामरिक महत्व की खबर सिर्फ उत्तरांचलदीप पर

डोईवाला। देहरादून एयरपोर्ट के सामरिक महत्व की खबर 2 वर्ष पहले सबसे पहले उत्तरांचदीप अपने पाठकों को दे चुका है। शुक्रवार के अंक में भी एयरपोर्ट के सामरिक महत्व से जुड़ी खबर उत्तरांचलदीप सबसे पहले अपने पाठकों को दे चुका है। एयरपोर्ट से जुड़ी अन्य अहम खबरें भी सबसे पहले उत्तरांचलदीप अपने पाठकों को दे चुका है।

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