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नैनीताल : तीन सप्ताह में आपत्ति शपथ पत्र पेश करने के निर्देश

नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बलिया नाले में हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए याचिकाकर्ता को सरकार के शपथपत्र पर तीन सप्ताह में आपत्ति शपथपत्र पेश करने को कहा है। खण्डपीठ ने जुलोजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया को एक बार फिर सर्वे करने के निर्देश दिए हंै। सरकार ने अपने शपथपत्र में कहा है कि उन्होंने बलिया नाले के भूस्खलन को रोकने के लिए दो करोड़ रुपये इरिगेशन विभाग को दे दिए हैं और जापान की कम्पनी जीका (जापान इंटर नेशनल कम्पनी) को डीपीआर बनाने के लिए दे दिया है। उसी के आधार पर निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा। सरकार ने अपने शपथपत्र में यह भी कहा है कि नाले से लगे पांच सौ मीटर के दायरे में रह रहे लोगों को भी अन्य जगह विस्थापित किया जाना है। इस शपथपत्र का अधिवक्ता द्वारा विरोध किया गया कि दो करोड़ रुपया कुछ नहीं होता है सरकार जनता को गुमराह कर रही है इस पर वह आपत्ति शपथपत्र पेश करेंगे। मामले के अनुसार नैनीताल हाईकोट के अधिवक्ता सईद नदीम मून खुर्शीद ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 1973 से नैनीताल के बलियानाला क्षेत्र में लगातार भू-स्खलन हो रहा है जिससे नैनीताल के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। वहीं सरकार द्वारा भी विगत कई वर्षों से करोड़ों रुपये इसके निर्माण में दे चुकी है मगर विभाग की लापरवाही से विभाग के कार्यों की पोल खुल गई है नतीजन आज यहां की स्थिति काफी भयावह बन चुकी है। पूर्व में खण्डपीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए थे कि एफआरआई द्वारा दायर शपथपत्र का अध्ययन कर भूस्खलन को स्थायी रूप से रोकने के लिए क्या उपाय किये जा सकते हंै इसकी विस्तृत रिपोर्ट के साथ दो सप्ताह के भीतर कोर्ट में पेश करें इस पर सरकार ने विस्तृत शपथपत्र पेश किया। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खण्डपीठ में हुई।

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