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हर रोज इंच-दर-इंच घट रही है जीवनदायिनी नैनी झील।

नैनीताल:तेजी से घट रहा नैनी झील का जलस्तर

नैनीताल। नवम्बर माह में नैनी झील का जलस्तर मानक के अनुसार 11 फीट होना चाहिए था। झील से लगातार जल दोहन होने से नैनी झील का जल स्तर 12 फीट से घटकर 10 फीट पर आ गया है। झील का जलस्तर एक से आधा इंच रोज घट रहा है। अभी लोगों में वर्षा व शीतकाल में बर्फबारी होने की उम्मीद है। अच्छी वर्षा व बर्फबारी ही अब झील में संतुलन बना सकती है। लेकिन अब झील का लबालब होना असंभव ही माना जायेगा। इस बार सबसे चिन्ता का विषय यह भी है कि अब तक झील के पानी को निकास द्वारों से नहीं निकाला गया। इससे जल का अधिक शुद्धिकरण भी नहीं हो सका है। झील विकास प्राधिकरण को लगातार पानी में एयरेशन का कार्य जारी रखना पड़ेगा।
प्राकृतिक रूप से नैनी झील वर्षा जल से 60 प्रतिशत व भूमिगत जल से 40 प्रतिशत रिचार्ज होती है। शीतकालीन बर्फबारी व वर्षा के बाद ही भूमिगत जल का सन्तुलन बना रहता है। बीते तीन वर्षों से नैनीताल में पर्याप्त बर्फवारी हुई और न ही शीतकालीन वर्षा नतीजन इसका सीधा असर नैनी झील में पड़ा। अब नवम्बर के अंत में ही झील का जल स्तर लगातार घटने लगा। अब चिन्ता यह बनी है कि मानसून का विदा हुए दो माह बीत चुके है। इस दौरान वर्षा भी नही हुई। जानकारों का कहना है कि झील के जलागम क्षेत्रों में स्थापित 11 नलकूपों से प्रतिदिन आठ लाख लीटर पानी जल संस्थान द्वारा पेयजल व सीवरेज के लिए दोहन किया जा रहा हैै। वहीं झील के प्राकृतिक स्रोत्र भी अधिक सक्रिय नहीं हो पाये है। सबसे प्रमुख कारण नैनी झील के जलागम क्षेत्रों में भवन निर्माण होना है। इससे झील को जो भूमिगत जल मिलता था वह सीमित हो गया है। नगर के अधिकांश प्राकृतिक धारे सूख चुके हंै। अब साल के अन्त तक भारी वर्षा व नये वर्ष में भारी हिमपात ही झील का सन्तुलन बना सकते हंै। अत्यधिक जल दोहन व अब तक वर्षा नही होने से झील का जलस्तर तेजी से घट रहा है। अगर आने वाले दिनों में यही हाल रहा तो झील की हालत बेहद खराब हो जायेंगे। 2016 की गर्मियों में झील गेज से 19 फिट नीचे चली गई थी। जिस कारण स्थानीय लोगों के साथ ही शासन-प्रशासन तथा पीएमओं कार्यालय ने भी इस पर गहरी चिन्ता व्यक्त की थी। लेकिन झील की सेहत सुधारने के लिए कोई भी कार्रवाई अभी तक अमल में नही लाई गई है।

 
डीएम ने पानी कटौती को जारी किये आदेश
नैनीताल। लाखों लीटर पानी जलागम क्षेत्रों से दोहन करने के बाद जीवनदायिनी नैनी झील का जल स्तर अब तेजी से घटने का कारण रहा है। लेकिन इसका मुख्य कारण सूखाताल में अवैध निर्माणों के कारण झील का रिचार्ज नही होना भी है। इसी के मद्देनजर डीएम विनोद कुमार सुमन ने जलसंस्थान को अब 14 एमएलडी के स्थान पर आठ एमएलडी पानी दोहन कर रोस्टिंग के हिसाब से पानी वितरित करने के निर्देश दिये है। मालूम हो कि इस वर्ष गर्मियों में पानी की रोस्टिंग करने से झील का जलस्तर शून्य से दो फिट ही नीचे गया था। बरसात के दौरान झील के लबालब होने पर कुछ भाजपा नेताओं के दबाव में आकर आयुक्त के निर्देश पर रोस्ंिटग खत्म कर दी गई थी। जिसके परिणाम स्वरूप झील का जल स्तर तेजी से घटने लगा। इसके बाद बीते दिन डीएम ने जलसंस्थान को पानी की रोस्टिंग करने के निर्देश जारी कर दिये। शहर में अब तीन घंटा सुबह व तीन घंटा सांय पानी वितरित किया जायेगा।

 
सूखाताल झील को पुनर्जीवित करना जरूरी : कोटलिया
नैनीताल। यूजीसी के भू-वैज्ञानिक प्रो. बहादुर सिंह कोटलिया ने नैनीताल क्षेत्र में होने वाले भूगर्भीय उथल पुथल व यहां की पहाडिय़ों पर हो रहे परिवर्तनों पर कहा कि नैनी झील का मुख्य रिचार्ज स्रोत सूखाताल है। बीते कुछ वर्षो में सूखाताल झील में मलुवा डालकर उसे पाटने का कार्य कुछ लोगों के द्वारा किया गया जिसमें कुछ सरकारी विभाग भी शामिल है जिन्होंने वहां अपने प्लांट भी लगाये हुए है जिससे पूर्व में सात मीटर ऊंचाई तक भरने वाली सूखाताल झील अब मात्र कुछ फिटो तक ही भर पा रही है। उन्होंने कहा सूखाताल झील को पुन: रिचार्ज करने के लिए करीब सात मीटर गहरी झील का पुन: निर्माण करना होगा। उन्होंने कहा बीते 140 वर्षो में नैनी झील में 130 सेंटीमीटर मोटी सिल्ट जमा हुई है जो नैनीझील के लिए खतरे का कारण है।

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