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लोगों को हंसा लो, इबादत हो जाती है…

टीएचडीसी कोटेश्वर में बही काव्य संध्या की महफिल
नामी कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया
देशभक्ति का जोश जगाया तो व्यवस्था की खामियों पर कसे तंज
नई टिहरी/ देहरादून। राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार की गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के कोटेश्वर प्रोजेक्ट में काव्य संध्या का आयोजन किया गया। बुधवार शाम हुई इस काव्य संध्या में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नामी कवियों ने अपनी सटीक रचनाओं से श्रोताओं का खासा मनोरंजन किया। कवियों ने रचनाओं के जरिये श्रोताओं को गुदगुदाया ही नहीं, माहौल में देशभक्ति का जोश भी पैदा किया। साथ ही भ्रष्टाचार, नेताओं और अफसरों के भ्रष्ट गठजोड़, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और व्यवस्था की खामियों पर जमकर तंज कसे।
प्रशासनिक भवन के प्रांगण में आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ कोटेश्वर परियोजना के महाप्रबंधक पीके अग्रवाल, अपर महाप्रबंधक डी. मणी, अपर महाप्रबन्धक सजीव आर. उपमहाप्रबंधक एके घिल्डियाल, उप महाप्रबन्धक (कार्मिक एवं प्रशासन) बीके सिन्हा, श्रीमती पूनम अग्रवाल धर्मपत्नि महाप्रबंधक पीके अग्रवाल, श्रीमती बीके सिन्हा, श्रीमती डी. मणी ने आमंत्रित कवियों के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया।
काव्य संध्या में प्रख्यात कवियों अरुण जेमिनी, दीपक गुप्ता, श्रीमती बलजीत कौर तन्हा दिल्ली, अर्जुन सिसोदिया व विनोद पाल आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। सम्मेलन में कवियों ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन करते हुए समाज मे व्याप्त बुराईयों पर तंज कसे और वर्तमान मे नेतांओं एवं राजनीतिज्ञों की तिकड़ी के मोहजाल से बचने की हिमाकत करते हुए समाज को नई दिशा देने का संदेश दिया। काका हाथरसी पुरस्कार से सम्मानित अरूण जैमिनी ने सभी सदी में ढूंढते रह जाओगे, आंखों में पानी दादी की कहानी, प्यार के दो पल, नल में जल, परोपकारी बन्दे, और अर्थी को कन्धा ढूंढते रह जाओगे…रचना से अपनी प्रस्तुतियों की शुरुआत की। काव्य गौरव डा अर्जुन सिसौदिया ने वीर रस से ओतप्रोत कविता दिलों में देश का जज्बा अजब तूफान रखते हैं , बतन पे शौदा होने का सभी अरमान रखते हैं, हम असफाक बिस्मिल और उधम सिंह के बेटे हो, मजहब कोई भी सीने में हिन्दुस्तान रखते हैं…रचना पेश की।
उत्कृष्ट शिक्षिका सम्मान से सम्मानित हो चुकीं बलजीत कौर तन्हा ने वाह-वाह क्या बात है… रचना पेश की। उन्होंने किसी को चाह लो तो चाहत हो जाती है, अपना बना लो तो आदत हो जाती है, मंैने जान लिया दिल में रहता है खुदा, लोगों को हंसा लो इबादत हो जाती है… रचना प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी । विनोद पाल दिल्ली ने आपके लिए चन्द कतरे लहू के लाया हूँ खुद मुरझा गया हूँ पर फूल खुशबू के लाया हूँ । आप लोगों को ताली बजानी ही होगी मैं घर से पत्नी के पांव छू के आया हूँ … प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। दीपक गुप्ता हरियाणवी ने कैसी आजादी है यहां सवेरों से डर लगता है जब से लुटे उजालों में अंधरों से डर लगता है और पाखंडी बाबाओं की करतूतों का ये आलम है, अब तो कोठों से भी ज्यादा डेरों से डर लगता है…रचनाएं पेश की। काव्य संध्या में टीएचडीसी कोटेश्वर के वरिष्ठ अधिकारियों में उपमहाप्रबंधक बीर सिंह व बीरेन्द्र सिंह मियां, सीएमओ डा प्रमोद कुमार, आयोजक सदस्यों में आरएस नेगी, सुनील बडोनी, धर्मप्रकाश त्यागी, हिमांशु असवाल, बीएस चौहान, एस. राणा, आरडी ममगाईं, केएस मेहता, पदम चमोली आदि उपस्थित रहे। काव्य संध्या का संचालन वरिष्ठ विधि अधिकारी गिरीश उनियाल ने किया।

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