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लोगों को फ्री में पहाड़ी व्यंजन देते हुए दीपक लेखवार।।।

लोगों को पहाड़ी व्यंजन फ्री में खिलाकर पलायन रोकना चाहता है पहाड़ का ये युवा 

सीएम कोठियाल, डोईवाला। पहाड़ से पलायन रोकना तमाम सरकारों के लिए अभी तक बड़ी चुनौती रहा है। जिसमें अब तक सभी सरकारें फेल रही हैं।

इस मामले में अब तक सिर्फ बातें और दावे ही किए गए हैं। ठोस नीति और संकल्प अभी तक किसी भी सरकार में नहीं दिखाई दिया है। पहाड़ के सीमांत क्षेत्रों से अधिक पलायन के कारण अब राज्य की सीमाओं पर पड़ोसी देश की घुसपैठ का खतरा भी बढ़ गया है। लेकिन पहाड़ का एक युवा ऐसा भी है। जिसने पलायन रोकने को एक अनूठी पहल की है। इस युवा का नाम दीपक लेखवार निवासी ग्राम पूजाहटी पट्टी बमुंड, टिहरी गढवाल है। जो विभिन्न कार्यक्रमों और समारोह में पहाड़ी व्यंजन बनाकर लोगों को फ्री में परोसते हैं। जिससे लोग अपने पारंपरिक खान-पान और संस्कृति की तरफ लौट सकें। दीपक का कहना है कि उत्तराखंड के लोग शादी-समारोह और दूसरे कार्यक्रमों में जो व्यंजन परोस रहे हैं। उनमें काफी कमियां हैं। जिस कारण लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। राज्य के होटलों और ढाबों में भी लोगों को वही आम खाना खिलाया जा रहा है।

यदि उत्तराखंड के लोग पहाड़ी व्यंजनों को शादी-समारोह और अपने घरों में नियमित इस्तेमाल करें तो इससे लोग सेहतमंद भी बनेंगे। और  पहाड़ में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कहा कि पहाड़ का कोदा, झंगोरा, दालें, कंडाली आदि चीजों को बड़े शहरों और विदेशों में मंहगे दामों पर बेचा जा रहा है। ऑन लाइन शॉपिंग वाले भी इससे मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। लेकिन हमारे राज्य में इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इसलिए वो पहाड़ी व्यंजनों को बढावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और समारोह में फ्री में पहाड़ी खाना बनाकर लोगों को खिलाते हैं। उनका मानना है कि पलायन रोकना सिर्फ सरकार का काम ही नहीं बल्कि प्रत्येक राज्यवासी को भी इस बारे में पहल करनी चाहिए।

टिहरी महोत्सव में चखा राजड़ी का स्वाद

डोईवाला। अठुरवाला में आयोजित किए जा रहे टिहरी महोत्सव में एक काउंटर पर दीपक लेखवार लोगों को फ्री में राजड़ी खिला रहे थे। उन्होंने बताया कि काले भट्ट और झंगोरे से तैयार होने वाले इस खास व्यंजन को देशी घी में खड़े मसाले ड़ालकर तैयार किया जाता है। जिसका स्वाद थोड़ा तीखा होता है।

दीपक को ऐसे मिली प्रेरणा

डोईवाला। दीपक लेखवार कैटरिंग के काम से जुड़े हैं। और द फेमस हलवाई के नाम से दिल्ली में उनका ऑफिस और तमाम शहरों में दुकानें  हैं। वो बताते हैं कि लगभग डेढ वर्ष पहले उन्हे राजस्थान में शादी का एक आर्डर मिला था। लेकिन उस परिवार का कहना था कि उनकी शादी में सिर्फ राजस्थानी खाना ही बनाया जाना है। दीपक ने उन्हे एक से बढकर एक खाने की लिस्ट बताई लेकिन राजस्थानी परिवार नहीं माना। दीपक लेखवार उस वक्त राजस्थानी खाने के बारे में अधिक नहीं जानते थे। इसलिए उन्होंने शादी का आर्डर छोड़ दिया। लेकिन इससे उन्हे ये सीख मिली कि दूसरे राज्य के लोग अपने खान-पान और संस्कृति को लेकर काफी आगे हैं। जबकि उत्तराखंड के युवा अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। तब से वो लोगों में जागरूकता लाने को पहाड़ी व्यंजन बनाकर तमाम कार्यक्रमों में फ्री में लोगों को खिला रहे हैं।

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