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उत्तराखंड: 142 बार उड़े माननीय, एक का भी नहीं खर्च का ब्यौरा

आरटीआई में पूछे गए सवाल पर हुआ खुलासा
हल्द्वानी। सूबे के नीति निर्धारक प्रदेश में आर्थिक संकट का चाहे कितना हवाला दें, लेकिन हवाई दौरों के मामले में सरकार बहुत आगे हैं। हम मानते हैं कि महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों का समय बेश कीमती होता है लेकिन हैरत वाली बात यह है कि सरकारी स्तर पर उनकी यात्राओं में होने वाले खर्चे का अलग से रिकार्ड तक नहीं रखा जाता है। यह खुलासा हुआ है हल्द्वानी के आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत गोनिया द्वारा पूछी गई एक जानकारी में।
दरअसल गोनिया ने उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण देहरादून से सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी कि मुख्यमंत्री ने पद ग्रहण करने के बाद से अब तक कितनी हवाई यात्रा की हैं। उन्होंने इन यात्राओं में होने वाला खर्च भी प्राधिकरण से पूछा था। प्राधिकरण के लोक सूचना अधिकारी कै. संतोष कुमार ने 5 फरवरी को जारी पत्र के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने बताया है कि सरकार बनने के बाद 47 बार राजकीय हेलीकाप्टर से और 45 बार सरकारी वायुयान से हवाई यात्राएं की गई हैं। लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि प्राधिकरण के पास इन यात्राओं में होने वाले खर्च का कोई विवरण उपलब्ध ही नहीं है। उन्होंने कार्यालय में विवरण न होनेके चलते इस बारे में जानकारी देना असंभव बताया है।
दी गई जानकारी के अनुसार इसके अलावा प्राइवेट हेलीकाप्टर व हवाई जहाजों से भी 50 यात्राएं की गई हैं कि और प्राइवेट कंपनियों को इन यात्राओं की एवज में 5करोड़ 85 लाख 10 हजार 70 रुपये किराया चुका गया। उन्होंने साफ किया है कि इन यात्राओं में सीएम के अलावा राज्यपाल व अन्य मंत्रियों की यात्राएं भी शामिल है। उन्होंने यहां भी पृथक से सीएम की यात्राओं में होने वाले खर्च का विवरण देना असंभव बताया है।
मतलब साफ है कि हमरे नीति निर्धारकों की हवाई यात्राओं का विवरण प्राधिकरण के पास है ही नहीं। यानी हमारी सरकार के हवाई यात्रा के खर्चों का कोई रिकार्ड सरकार के पास नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले राज्य के सीएम द्वारा मेहमानों की चाय पानी में लाखों का खर्च विवाद का विषय बन चुका है।

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