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17 सालों में 14 उपचुनाव झेल चुका है उत्तराखंड, उपचुनाव झेलना बन चुकी है जनता की नियति

धीरज भट्ट

हल्द्वानी। उत्तराखंड का गठन हुए 17 वर्ष पूरे हो चुके हैं लेकिन इस दौरान राज्य की जनता 14 उपचुनाव झेल चुकी है जिनमें 11 विधानसभा व तीन लोकसभा के उपुचनाव शामिल हैं। इधर थराली के विधायक के निधन के बाद राज्य में एक और विधानसभा की सीट पर उपचुनाव होगा।
विदित हो कि राज्य में पहला उपचुनाव रामनगर विधानसभा सीट पर हुआ था। यहां के नारायण दत्त तिवारी ने विधानसभा में एंट्री मारी थी। उनके लिए कांग्रेस के तत्कालीन विधायक योगंबर सिंह रावत ने सीट खाली करी थी। इसके बाद राज्य में विभिन्न कारणों से अभी तक 11 बार विधानसभा व तीन बार विधानसभा के लिए उपचुनाव हो चुके हैं।
विधानसभा उपचुनाव
वर्ष——-सीट
2002——रामनगर
2004——द्वाराहाट
2005——-कोटद्वार
2007——धुमाकोट
2009——विकासनगर
2009——कपकोट
2012——सितारगंज
2012——सोमेश्वर
2014——डोईवाला
2014——धारचूला
2014——भगवानपुर
लोकसभा के उपचुनाव
नैनीताल—-2002
पौड़ी—— 2008
टिहरी——-2012

निधन के बाद चुनाव होने की घटना तीसरी घटना
हल्द्वानी। राज्य में किसी विधायक के निधन के बाद उपचुनाव का यह तीसरा मामला है। राज्य में सर्वप्रथम 2004 में द्वाराहाट के विधायक विपिन त्रिपाठी के निधन के बाद द्वाराहाट सीट खाली हुई थी। वहीं 2014 में भगवानपुर के विधायक सुरेन्द्र राकेश के निधन के बाद यहां उपचुनाव कराना पड़ा था। इधर थराली के विधायक का निधन हो जाने के बाद यहां पर उपचुनाव का मामला तीसरा होगा।

तीन बार लोकसभा के लिए भी हो चुके हैं उपचुनाव
हल्द्वानी। राज्य में नारायण दत्त तिवारी के सीएम बनने के बाद उन्होंने नैनीताल लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद यहां से उपचुनाव हुआ। दूसरी बार 2007 में पौड़ी के तत्कालीन सांसद भुवन चन्द्र खंडूरी के सीएम चुने जाने के बाद यहां पर भी उपचुनाव कराया गया। इसके बाद 2012 में टिहरी के सांसद विजय बहुगुणा के सांसद चुने जाने बाद टिहरी में उपचुनाव कराया गया।

 

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