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उत्तराखंड की जूही को लघु फिल्म वर्ग में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सम्मान

देहरादून। मुस्लिम महिलाओं के जीवन चक्र पर आधारित और उनकी भावनाओं को व्यक्त करती हुई डाक्यूमेंट्री वेइल डन की निर्देशक उत्तराखण्ड मूल की जूही भट्ट को इस वर्ष की सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के रूप में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सम्मानित किया गया है। मूलत: पिथौरागढ़ के बिसाड़ गांव की मूल निवासी जूही भट्ट आईटीबीपी से सेवानिवृत्त महानिरीक्षक (नार्दन फ्र ंटियर) मोहन चन्द्र भट्ट की पुत्री है। जूही भट्ट को यह सम्मान नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सूचनाएवं प्रौद्योगिकी मंत्री स्मृति ईरानी व केन्द्र सरकार के खेल राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौर की उपस्थिति में दिया गया। इस वर्ष लघु फिल्म वर्ग में सम्मान पाने वाली जूही भट्ट उत्तराखंड की एक मात्र निवासी हैं।
दिल्ली की निजामुद्दीन बस्ती में रहने वाली तीन मुस्लिम महिलाओं के जीवन पर आधारित इस फिल्म की अवधि लगभग एक घंटा है। नामांकन से पूर्व इस फिल्म को दूरदर्शन के मुख्य चैनल में 2 बार दिखाया गया था। जूही भट्ट ने जामिया मिलिया इस्लामिया से जनसंचार में स्नातक किया है और वे लम्बे समय से समसामायिक मुद्दों पर कार्य कर रही हैं। जूही की इसी डाक्यूमेंट्री को करांची पाकिस्तान में आयोजित लघु फिल्मों की श्रेणी में अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
फिल्म की कहानी निजामुद्दीन बस्ती में खुले उस जिम के आस-पास घूमती है। जहां मुस्लिम महिलाओं के लिए भी अलग से समय निर्धारित किया गया है। ऐसे में लोक लाज के दबाव के बाद भी ये तीनों महिलाएं जिम में जाती हैं और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए जद्दोजहद करती हैं। अन्त में इनका घर परिवार भी इनके इन प्रयासों को मान्यता देता है।

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