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खाली पडी चिकित्ससक की कुर्सी

बाजपुर:वेंटिलेटर पर पड़ा अंतिम सांसे गिन रहा बाजपुर का सामुदायिक स्वास्थ केंद्र

बाजपुर। चिकित्सकों से विहीन लगभग दो लाख लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वाला बाजपुर का सामुदायिक स्वास्थ केंद्र आज खुद वेंटिलेटर पर पड़ा अंतिम सांसे गिन रहा है। जिसका खामियाज यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं स्वास्थ सेवाओं को लेकर दंभ भरने वाली प्रदेश सरकार की घोषणायें कोरी बकवास नजर आने लगी हैं।
यह चिकित्सालय दिग्गज कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की विधानसभा में स्थित है। राम भरोसे चल रहे इस चिकित्सालय में डॉक्टरों के 14 पदों में से 12 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद रिक्त चल रहे हैं। यहां दो ही डॉक्टरों की तैनाती है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता यहा आने वाले मरीजों को क्या चिकित्सा सुविधा मिलती होगी लेकिन सरकार ने अपनी नाक बचाने के लिए संविदा पर एक महिला सहित दो चिकित्सक तैनात किये हुए हैं जो केवल दो बजे तक अपनी सेवायें देते हंै। नेता और मंत्री जो सत्ता की कुर्सी पाने के लिए जनता के बीच जाकर तरह तरह की सुविधा व राहत देने की बात करते है जबकि इस चिकित्सालय को लेकर जनप्रतिनिधि ही नहीं कैबिनेट मंत्री भी अपने लच्छेदार भाषणों से जनता को गुमराह कर जल्द हर सुविधायें व राहत देने की बात करते नहीं थकते हंै लेकिन उनके लच्छे दार भाषणों की बाजपुर का ये सामुदायिक स्वास्थ केंद्र पोल खोलता नजर आ रहा है। जब बीजेपी सरकार को बने 3 महीने ही हुए थे उस समय इस चिकित्सालय के बारे में मौजूदा विधायक व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य का कहना था कि सरकार के पास कोई जादू की छड़ी तो नहीं है जो हम सब कुछ एक साथ कर दें लेकिन हैरानी की बात यह है की सरकार को बने लगभग 15 महीने हो गये हैं लेकिन आज भी इस चिकित्सालय के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है।

 
चिकित्सालय में कई पद चल रहे हैं रिक्त
बाजपुर। इस चिकित्सालय में चिकित्सालय अधीक्षक, नेत्र रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, शल्य चिकित्सक, हड्डी रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, रेडियोलोजिस्ट, पेथौलोजिस्ट, निश्चेतक, दंत रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा लैब टैक्निशियन, डार्क रूम सहायक, वाहन चालक, कुक, धोबी कहार के पद रिक्त रहे है। इसके अलावा नर्स व वार्ड बाय के तीन-तीन तथा कक्ष सेविका का भी एक पद रिक्त चल रहा है। जिसमें से कुछ पद तो 10-10 वर्ष से रिक्त चल रहे हैं।

 
कामचलाऊ चिकित्सालय अधीक्षक दे रहे हैं सेवायें
बाजपुर। सरकार ने अपनी नाक बचाने के लिए काशीपुर चिकित्सालय के अधीक्षक खीम पाल जी को बाजपुर में तैनात कर रखा है। जो बाजपुर के अलावा केलाखेड़ा चिकित्सालय की व्यवस्था देख रहे है। वह एक रेडियोलोजिस्ट है आने वाले मरीजों की परेशानियों को देखते हुए वह अल्ट्रासाउंड करने के साथ ही ओपीडी में मरीजों को देख रहे हंै। वर्तमान में जब अधिकांश धरती के भगवान शैतान बने बैठे है ऐसे में खीम पाल जी दिन रात मरीजों को दिन-रात अपनी सेवायें देकर मानवता का उदाहरण पेश कर रहे हैं।

 
सबसे अधिक परेशानी होती है गर्भवती महिलाओं को
बाजपुर। व्यवस्था बनाये रखने के लिए चिकित्सालय में महिला डॉक्टर को संविदा पर तैनात किया गया है जो केवल एमबीबीएस डिग्री धारक हैं। महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की स्थाई नियुक्ति न होने का खामियाजा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। गर्भावस्था के अंतिम चरण में मरीज को चिकित्सालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। ऐसे में आशा कार्यकत्रियों को मजबूर होकर गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराने के लिए निजी नर्सिंग होमों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, जहां मरीजों से जमकर लूट खसोट की जाती है। यहां भी जमकर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, चिकित्सालय में तैनात संविदा महिला चिकित्सक द्वारा चिकित्सालय के सामने अपना निजी चिकित्सालय खोल रखा है।

 

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