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देहरादून : विपक्ष ने सरकार से मांगा इस्तीफा, जहरीली शराब कांड पर सदन में किया जोरदार हंगामा

देहरादून। जैसे आसार थे उसी के अनुरूप उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को हंगामे के साथ शुरु हुआ। जहरीली शराब कांड पर विपक्ष ने सदन के भीतर जोरदार हंगामा किया। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने वेल में आकर जोरदार हंगामा किया। हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और आबकारी मंत्री व सरकार से इस्तीफे की मांग की। राज्यपाल से सरकार को बर्खास्त करने की मांग भी विपक्ष की ओर से की गई। राजपाल का अभिभाषण निर्धारित समय 11 बजे से पहले शुरू करे जाने पर भी विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताते जुए सदन से वॉक आउट कर दिया।
बजट सत्र की शुरुआत आज राज्यपाल के अभिभाषण से होनी थी। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य निर्धारित 11 बजे से पहले ही सदन में पहुंच गईं थी। राष्ट्रगान के बाद उन्होंने 11 बजे से पहले ही अपना संबोधन शुरु कर दिया। राज्यपाल के अभिभाषण को अभी कुछ ही मिनट हुए थे कि विपक्ष के सदस्य विरोध जताने के लिए वेल में आ गए। जहरीली शराब कांड के विरोध में हाथों में तख्तियां लिये विपक्ष के विधायक वेल में नारेबाजी करने लगे। शर्म करो, शर्म करो, त्रिवेंद्र सरकार शर्म करो, मौतों को सौदागर सरकार इस्तीफा दो और राज्यपाल सरकार को बर्खास्त करो आदि नारों से विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया। विपक्ष ने राज्यपाल का संबोधन समय से पहले शुरू होने पर भी कड़ी आपत्ति जताई और हंगामा जारी रखा। शोर शराबे के बीच ही राज्यपाल ने अपना संबोधन जारी रखा। करीब 11.7 बजे हंगामा करते हुए विपक्षी सदस्य सदन से वॉक आउट कर गए।
विपक्ष के सदन से चले जाने के बाद राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने अपना संबोधन पूरा किया। स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें अभिभाषण पढऩे में दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। 43 पेज के अपने अभिभाषण में राज्यपाल ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी व विकास योजनाओं, कार्यक्रमों और भविष्य के इरादों पर प्रकाश डाला। अभिभाषण पूरा होने के बाद राज्यपाल सदन से चली गईं। इसके बाद सदन की विधिवत कार्यवाही विश्राम के बाद 3 बजे से शुरू हुई। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल राज्यपाल के अभिभाषण को पढक़र सुनाएंगे, इसी के साथ अभिभाषण सदन की संपत्ति बन जायेगा और बजट सत्र की भी विधिवत शुरुआत हो जाएगी।

 

 

सरकार को सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं : प्रीतम
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने आज सरकार पर करारे हमले बोले। सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि त्रिवेंद्र सरकार पूरी तरह से असंवेदनशील सरकार है। किसान व्यापारियों की आत्महत्या के बाद अब जहरीली शराब से हुई मौतों की दर्दनाक घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बॉर्डर पर अवैध शराब का धंधा अरसे से चल रहा था। स्थानीय लोग प्रशासन व पुलिस को इस बाबत लगातार सूचित कर रहे थे, लेकिन सरकारी तंत्र जागा नहीं। 130 अधिक मौतें हो जाने के बाद अब तंत्र की नींद खुली है। उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री अभी तक पीडि़त परिवारों से मिलने का समय नहीं निकाल पाए हैं। सरकार सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुकी है। राज्यपाल इस सरकार को बर्खास्त करें। उन्होंने जहरीली शराब से मरे लोगों के परिजनों को 10-10 लाख मुवावजा और जिन परिवारों का कमाने वाला चला गया, उनके एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की मांग की।

 

 

सदन और प्रतिपक्ष का किया अपमान : इंदिरा
देहरादून। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश भी सरकार पर जमकर बरसीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्यपाल का अभिभाषण निर्धारित समय से पहले शुरू कराकर संसदीय परंपराओं, कार्यसूची, सदन व प्रतिपक्ष का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि अपने 45 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने पहली बार ऐसा होते देखा है। यह सरकार की घबराहट को दर्शाता है। उन्होंने कहा सरकार की यह बड़ी संवैधानिक व संसदीय चूक है। सरकार को किसी का डर नहीं है, इसलिये मनमानी कर रही है। अब लोकसभा चुनाव में जनता ही सरकार को बताएगी की डर क्या होता है।

 

 

परंपराओं के अनुरूप हुआ सबकुछ : कौशिक
देहरादून। कैबिनेट मंत्री एवं शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्ष ने बेवजह हंगामा किया है। सदन में सबकुछ नियमों के तहत और परंपराओं के अनुरूप ही हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद सर्वोच्च संवैधानिक पद है। विधानसभा में उन्हें बैठाने की व्यवस्था नहीं है। न ही राज्यपाल को डिक्टेट किया जा सकता है। विपक्ष को यह मालूम होना चाहिये। मदन कौशिक ने कहा कि राज्यपाल विधानसभा में कुछ मिनट पहले पहुंच गई थीं, इसलिए उनका अभिभाषण थोड़ा पहले शुरू कराया जा सकता था। उल्टा विपक्ष ने हंगामा कर परंपराओं की अनदेखी की है। जहरीली शराब कांड पर उन्होंने कहा कि सरकार हर तरह से गंभीर है व संवेदनशील है। हंगामा करने से कुछ नहीं होगा। विपक्ष सदन के भीतर चर्चा के लिए आगे आये, सरकार जवाब देने के लिए तैयार है।

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